Drama

She fought!

CHAPTER 1

It was a usual Monday morning when Kalpana was sitting in her courtyard, having her favourite black coffee and reading “Times Now”. Since Kalpana was the only child of her parents, she grew up very nicely and under much care and supervision. At the age of 17, her parents died. Her father committed suicide because of a big loss in his company. His wife, couldn’t bear her husband’s death, set herself on fire and died.

Kalpana then shifted to Mumbai with her grandparents. She worked as an assistant in the accounts department at Aryan Textiles.

15 years later,

Phone rung.

“There’s a meeting today Kalpana, be on time.” a man on the other side of the phone said.

“Sure sir,” Kalpana replied.

She was a very punctual and hard working woman. Having suffered a lot, the situation made her strong. But what was going to enter her life, was beyond her expectations.

She parked her car in the parking and went up to the conference room. The meeting got over after 5 hours. It was a long, tiring session and everyone went out for a break. Kalpana too went out accompanied by her boss, with whom she was secretly in love. Kalpana was 32 then, wanted to stabilize her life with a partner. She had been rejected many times, because of her family past. But her boss, Arjun never judged her.

“Will you come over for dinner tonight?” Arjun asked Kalpana while sipping his coffee, sitting in the cafe.

“Dinner? But where?” Kalpana replied.

“My place. Everyone has gone out on vacations. And I make good food,” Arjun winked while keeping his cup down.

“Umm…..ok. May God help me with that food!” Kalpana replied and both burst out in laughter.

“See you tonight, then.”

Kalpana dressed in the best way possible. She somehow felt that that night there was something special going to happen. She hadn’t delayed even a minute in reaching Arjun’s place. As she parked her car outside his house, Arjun came out and gave her a welcome hug. Kalpana was happy. They entered the house. Kalpana sat on the couch while Arjun went into the kitchen. After half an hour Arjun came out with the food already served very nicely. Both of them had their dinner. And then they moved to a corner table where some wine was already arranged.

They both sat cozily, engaged in their talks, accompanied by wine. Arjun stared at Kalpana hard, with a broad smile on his face. Kalpana blushed. Arjun leaned forward towards her face, but she is shy, dropped her head down. Her cheeks, pink. As Arjun held her chin up and closed his eyes, they heard a thud in the backyard. They immediately got up and rushed towards the back door.

“Kalpa…” Arjun shouted.

Kalpana turned towards Arjun and saw him descending to the ground. A bullet was shot into his head. Kalpana rushed towards him, and suddenly something struck her neck. It was a dart. Kalpana unconsciously fell on the ground.

When she woke up, she was in a moving truck. Her hands and legs tied, but her eyes were uncovered. She could see mountains through a slit in the truck’s wall. She was being taken somewhere. She somehow untied herself and made her way to a bigger slit to assess the situation. She saw Chinese flags all across the road. There was only sand as far as she could see. She understood that she has been kidnapped and now was in the process of being smuggled. She had to do something.

Kalpana started shouting and yelling but the noise of the truck made it impossible for her to be heard. She saw a small axle kept in the corner. She made a plan. She would jump out of the truck and run her way back. So she used the axle to widen the slit and tried breaking the wooden wall. The truck was still moving. She somehow managed to open the door, but she was unaware that the door had an alarm that went loud immediately. The brakes were applied. She did not have much time.  She jumped off the running truck. She landed on her knees and got injured. But still, she managed to run with her injured leg, dragging it on the road.

Soon a man from the truck came down and ran towards her. He had a pistol in his hand. Soon two more men came down and started chasing her. She could not pace faster than them. A man warned her to stop. But she didn’t. He shot her. A bullet pierced through her shoulder. Kalpana yelled. She was screaming loudly. Those men walked towards her. On getting hold of her, she fidgeted and tried biting their hands, but it was a useless effort. Since she was outnumbered she had no chance to run, but to surrender. A guy came forward and held her by her hair. She jumped in pain. Her condition was getting worse.

But in the heat of the moment, those men forgot that she had her left hand free to move. Kalpana wasted no time and punched the guy behind her, in the eyes. Immediately she took his pistol from his hands, turned around and shot the man standing on the left. As he was falling down, the third got furious and took out his pistol and pointed at Kalpana. She knew that at that moment, either he’ll shoot or she. She took the first call and shot that guy too, on his head. All three men were down. She was saved from being transported to some other country.

Soon she crumbled down in pain and agony. She somehow managed to keep her eyes open. The sun was blazing hot. She heard a noise. The mirage made it impossible to see what it is. But after a while, it turned out to be a car and she was saved.

CHAPTER2

मुंबई से किसी तरह निकल के कल्पना नॉएडा पहुँची। उसके मन में एक उम्मीद थी की अब उसके ज़िन्दगी में कुछ अच्छा हो सकता है। उसे क्या पता था उसके ज़िन्दगी में एक नया तूफ़ान आने वाला था। एक दिन अचानक जब वो सिग्नल के पास कुछ खाने के लिए ढूंढ रही थी तभी एक अंजान इंसान कर बोलता है, “तुम कुछ काम करोगी अगर मैं दूँ तो?” कल्पना को पैसों की बहुत जरुरत थी, उसने तुरंत हाँ बोल दिया। उस इंसान का नाम श्याम था और वो उसे अपने मालिक के घर ले गया, जहाँ वो ड्राइवर की नौकरी करता था। कल्पना को घर का सारा काम करना था। उसको ये फर्मान सुना दिया गया की सुबह बजे उठ जाना ताकि सारा नाश्ता बना सको। अगली सुबह कल्पना की नींद नहीं टुटी। मालकिन ने उसे ताने मारते हुए उठाया, “उठ जा कितना सोयेगी, सब का नाश्ता बनाना है। वो ऊठी और अपने काम पर लग गई। सब्जी में नमक कम हो गया था।ये क्या बनाया है? बेसवाद है पुरा, ” ऐसा उसके मालिक ने कहा।कुछ नहीं आता इस लड़की को श्याम। कहाँ से उठा के लाया है?” मालकिन ने कहा। श्याम ने कहा, “मैडम जी सिख जाएगी।सुबह किसी तरह पार हुई। कल्पना को अगला काम दिया गया की बच्चों के लिए खाना बना लेना। शाम को जब मालिक और मालकिन घर वापस आये तो कल्पना ने बोला, “दीदी, वो नमक और आटा ख़त्म हो गया है” “क्या बोल रही है!, अभी कुछ दिन पहले ही तो लाई थी मैं। तुने सब बर्बाद कर दिया होगा। दिखा तो डाब्बारसोई घर की हालत देखने के बाद तो ऐसा लग रहा था कि जैसे वहाँ कोई तूफ़ान ही गया होआज तुझे कुछ मिलेगा खाने कोउस रात सिर्फ पानी पी के रह गई कल्पना।

 

उन ऊँची इमारतों में पैसे जरूर होते हैं, पर इंसानियत कहीं मर गयी होती है।

 

अगले दिन कल्पना फिर बहुत मुश्किल से अपने आप को सँभालते हुए उठी। दो दिन से कुछ खाने को नहीं मिला है। उसके मालिक के घर कुछ मेहमान आने वाले थे आज। एक रात में जाने कितने काम दे दिए थे उसकी मालकिन ने उसे। मेहमानों के जूठे बर्तनों को धोते वक़्त उसमें बचा हुआ खाना छुपछुप के खा रही थी कल्पना। उस रात उसे जा के कुछ खाने को मिला। एक सूखी रोटी और एक प्याज़, जैसे की वो किसी जेल में कैद हो। मालकिन जब भी अपने बच्चों पर प्यार जताती थी उसे बार बार अपनी माँ और पापा की याद आती थी। पर उसके पास पैसे थे की वो मेरट पहुँच सके और ना ही कोई सहारा। इतना सब देखने के बाद उसे पता चल गया था कि ये दुनिया उतनी अच्छी नहीं है जितना वो समझती थी। उसकी ज़िन्दगी में मानो तुफानों का सिलसिला ख़त्म ही नहीं हो रहा था। मालकिन को एक दिन बहुत ज्यादा ग़ुस्सा गया जब उनकी इम्पोर्टेड करौकरी ग़लती से कल्पना से टूट गई एक चाटा उन्होंने मारा और बाकि मालिक की बेल्ट से पड़ा।कुछ नहीं आता इसे,कितना नुकसान कर दिया, क्या सिर्फ खाना खाने को रखा है तुझे?” उस मार के बाद, उसका पूरा शरीर टूट रहा था, पर उसे क्या फर्क पड़ता है, काम तो करना ही है। अब उसके ज़िन्दगी का सबसे बड़ा तूफ़ान गया था। अमित, जो की सामने वाली फ्लैट में ड्राइवर का काम करता था और जब से कल्पना को देखा था उस से एक बार बात करना चाहता था। आखिरकार, जब एक दिन कल्पना सब्जी ले कर ऊपर रही थी तब उसे ये मौका मिल गया कि वो कल्पना से बात कर सके।जी आपका नाम कल्पना है ना?” अमित ने पुछा।हाँ,” कल्पना ने जवाब दिया और वहाँ से जल्दी में निकल गई, क्योंकि अगर वो आज देर करती तो पता नहीं उसके साथ और क्या करते उसके मालिकमालकिन। अमित ने अपनी कोशिश नहीं छोड़ी और फिर बात करने पहुँच गया।इस बार कल्पना को कोई डर नहीं था, क्योंकि उस दिन होली की पार्टी चल रही थी। अमित को कल्पना पसंद थी। और वो दोनों अब हर दिन कही कही मिल लेते थे। कल्पना को अमित पसंद था क्योंकि इतने समय बाद उसे कोई मिला था जो उसका ख्याल रखता था। कल्पना उस घर को छोड़ के अमित के साथ जाना चाहती थी। पर जब आज तक उसके चाहने से कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा।

कल्पना ने बड़ी हिम्मत कर के मालकिन को बोला की, “मेरे पैसे दे दीजिये मुझे अमित के साथ जाना है।” “क्या कौनसे पैसे? उल्टा तुझे हमे पैसे देने हैं। कितना सारा नुकसान करा है तुने। और जाने की बात तो तुम सोचना भी मत। वरना तेरे उस अमित को पुलिस को दे देगें, समझी“, इतना सब कुछ बोल के मालकिन वहाँ से चली गई। कल्पना ने अमित को सब जा के बता दिया, उसने बोला, “चल, मैं तेरे लिए पैसे कमा लूँगा,जाने दे इन्हे। आज रात को तुम जाना बिल्डिंग के नीचे फिर हम दोनों चलेंगे।कल्पना ने जब भागने की कोशिश की तो पकड़ी गई और बहुत मार पड़ी उसे।अब तु बाहर ही नहीं जाएगी, ” एक और नया फर्मान जरी हो गया।

 

ऐसा लगता था की उन लोगों ने कल्पना को खरीद लिया हो।

 

अगले दिन रात को जब सब सो गए थे तो वो अमित से मिली और बोलीअभी ही चलो यहाँ से।आमित और कल्पना वहाँ से जाने ही वाले होते है की कल्पना के मालिक और मालकिन जाते हैं।हमको चकमा दे कर भागेगी।रुक अभी बताता हूँ।एक स्टील की रॉड से कल्पना को मारने उसके मालिक लोग बढे पर अमित सामने गया और उसके सर से खून निकलने लागा।अमित उठो, उठो ना,” बिल्कती आवाज में कल्पना बोली।आपने उसे मार तो नहीं दिया?” मालकिन का स्वाल था मालिक से।इसको लेके घर जाओ तुम, मैं इस लड़के को देखता हूँ।” “ख़बरदार जो इसको हाथ लगाया है,मार डालूँगी तुम दोनों को। पिछे एक दम पिछे, मेरे पिछे मत आना,” कल्पना के अंदर जाने कैसी ताकत गई थी। कुछ नहीं बोलने वाली कल्पना अमित को इस हालत में देख दुर्गा का रूप ले चुकि थी। कल्पना किसी तरह से अमित को ले के अस्पताल पहुँची।हि इज़ डेड?” डोक्टर ने कहा।

काल्पना की ज़िन्दगी ख़त्म हुई थी या अमित की पता नहीं। एक बार के लिए सोचा जा के कुद जाये वो भी किसी ऊँची जगह से पर फिर सोचा अपने और अमित के गुन्हेगारों को छोड़ के कैसे वो अपनी जान दे दे। अब शुरू होगी कल्पना की नई कहानी, अमित की मौत और अपने पे हुए हर जुल्म की सज़ा दिला के।

CHAPTER3

अमित की मौत के बाद कल्पना बिल्कुल टूट सी गई, उसे कुछ समझ नहीं रहा था कि वो आगे क्या करे, किसके पास जाए, किससे मदद माँगे, अपने लिए न्याय की उम्मीद किससे करे।इन सभी ख्यालों को अपने मन में लिए कल्पना चली जा रही थी। फिर अचानक वह बेहोश हो कर सड़क पे गिर गईं। कल्पना को सड़क पे पड़े देख, एक व्यक्ति की उसपे नज़र पड़ी। वह कल्पना को अस्पताल ले गया।कल्पना के होश में आने के बाद जब उसने उसका हाल पूछा कि वह सड़क पे इस हालत में क्यों थी, तो कल्पना ने उसे सारी बात बताई।सभी बातें सूनने, और समझने के बाद उसने कल्पना की मदद करने का फैसला किया। उस व्यक्ति का नाम राकेश था वह एक एनजीओ में काम करता था।वह एनजीओ अनाथ बच्चों की देख भाल करता था। राकेश ने कल्पना को उसमें काम करने के लिए बोला, और कल्पना मान गई। उसके ठीक होने के बाद राकेश कल्पना को अपने साथ ले आया, वहाँ कल्पना का काम था बच्चों के लिए खाना बनाना और उनका ख्याल रखना।राकेश ने कल्पना को एक दिन बच्चों की किताबें पढ़ने की कोशिश करते देखा तो उसने सोचा कि कल्पना को उसकी एनजीओ में पढ़ाया जा सकता है, उसकी एनजीओ रात को सभी उम्र के लोगों के लिए स्कूल चलाती थी। राकेश ने कल्पना का नामांकन वहाँ करा दिया। कल्पना की कहानी की एक अच्छी शुरुआत हो रही थी।और अब वह यह महसूस करने लगी थी, की उसका अभी तक जिंदा रहना कोई इतेफाक़ नहीं था, उसे यहाँ रहना था एक मंजिल पाने के लिए। वक़्त गुजरता गया कल्पना काम करती रही, पढ़ती रही।अचानक एक दिन उसने अपने मालिक और मालकिन को बाज़ार में देखा।वापस आकर उसने राकेश को बताया तो राकेश ने उससे बोला कि वह अभी अपनी पढ़ाई पे ध्यान दे, इंसाफ दिलाने में वह उसकी पूरी मदद करेगा। वहाँ एक आदमी रहता था जिसको सब लोग जोकर कहते थे।एक दिन कल्पना की मुलाकात अचानक जोकर से हुई, वह डर गई और दूर भाग गई। जोकर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गया। जब कल्पना ने जोकर के बारे में राकेश से पूछा, तो उसने उससे जोकर से दूर रहने को बोला, क्योंकि वो पागल है। और उसे यहां कुछ समय के लिए रखा गया क्योंकि उसके मालिक ने ऐसा बोला है। लेकिन जोकर की मुस्कुराहट में कुछ राज़ छिपे थे, कुछ गहरी बातें दबी थी। अब वक़्त नजदीक रहा था कि कल्पना अपना इंसाफ माँगे। कल्पना ने अपनी पढ़ाई पूरी की और अब आईएएस बनना चाहती थी। यह बात उसने राकेश को बताई तो उसने बोला कि तुम अपने सपने पूरे करने के लिए आगे बढ़ो और शायद ये रास्ता तुम्हे तुम्हारे इंसाफ तक ले जाए।कल्पना ने पूछा, “यह कैसे हो सकता है ?” तो उसने बोला तुम्हारे अफसर बनने के बाद तुम अपनी ताकत से अपने मालिक और मालकिन के खिलाफ सबूत जमा कर उन्हें सज़ा दिला सकती हो। यह सुनकर अपने सपने को पूरा करने में कल्पना ने रात दिन एक कर दिए। राकेश ने एक दिन  कल्पना से पूछा कि क्या तुम्हे पता है कि वह लोग रहते कहाँ है। तो उसने पूराना पता बताया ।राकेश जब उस पते पे गया तो कहानी में एक नया मोड़ आया। वह घर एनजीओ के मालिक का था। और राकेश उनके लिए काम करता था। लेकिन राकेश ने अपने मालिक को कुछ नहीं बताया और वापस गया। और कल्पना को बोला कि वह लोग अभी भी वही रहते है। कल्पना ने आईएएस की परीक्षा दी और उसने आईएएस पद हासिल कर लिया। राकेश ने कल्पना को यह बताया कि, की यह एनजीओ उसके मालिक का है। और वह इस एनजीओ के नाम पे सरकार से ना जाने कितने पैसे लेता है। और वह यहाँ बच्चों को सिर्फ तब तक रखता है जब तक वो उसके काम लायक ना होजाय। वह  बच्चों  को बेच देता है। और इससे उसका पूरा धंधा चलता है। यह सुनकर कल्पना ने उससे सारे सबूत लाने को कहा जिससे वह उन पे केस कर सके और सज़ा दिला सकें। एक दिन जब वह एनजीओ से  अपने दफ्तर जा रही थी तो जोकर उससे कुछ बताना चाहता था, वह उससे इशारे कर रहा था लेकिन वह समझ नहीं सकी और बिना ध्यान दिए आगे निकल गई। सारे सबूत मिलने के बाद चाइल्ड ट्रैफिकिंग और एनजीओ में फ्रौड़ करने का केस किया कल्पना ने और उसके आईएएस होने के कारण केस फास्ट ट्रैक होगया। और कोर्ट में कारवाई हुई और दोनों को सज़ा हो गई। कोर्ट ने सज़ा सुनने के लिए उन्हें अगले दिन बुलाया। दिन बदल गया और कल्पना राकेश के साथ कोर्ट जाने के लिए एनजीओ से निकल रही थी कि फिर से जोकर ने उसका हाथ पकड़ लिया और कुछ बताने की कोशिश करने लगा लेकिन राकेश ने उसे पीछे कर दिया और बोला कल्पना तुम आगे जाओ मैं इसे दवाई देके आता हूँ। कल्पना आगे निकल गई लेकिन कोर्ट तक नहीं पहुँची क्योंकि उसका ऐक्सिडेंट हो गया और जिस ट्रक से उसका ऐक्सिडेंट हुआ था उसके ड्राइवर ने सरेंडर कर दिया, यह वही था जो कल्पना के मालिक के यहाँ ड्राइवर था। और उसने यह बोला की यह ऐक्सिडेंट उसने अपने मालिक के कहने पर किया, जिससे उससे उमर कैद और उसके मालिको को फाँसी की सज़ा हो गई। और शायद कल्पना को इंसाफ मिल गया, लेकिन नहीं इंसाफ नहीं मिला उसे क्योंकि कातिल अभी भी जिंदा था, और वह था राकेश क्योंकि एक कहानी राकेश ने लिखी जिसपे चलकर कल्पना मौत हो गई। चलो  कहानी के कुछ पन्ने फिर से उलट ते है, राकेश ने कल्पना का साथ इसलिए दिया  क्योंकि वो एनजीओ का मालिक बनना चाहता था।और यह सिर्फ तब हो सकता था जब उसके मालिक की मौत हो जाए। तो फिर कल्पना की मददकरते हुए उसने सब कुछ पाने का ख्वाब देखा जो पूरा हो गया। लेकिन सिर्फ चाइल्ड ट्रैफिक और फ्रौड़ के केस में फाँसी की सज़ा नहीं मिलती तो उसने कल्पना को मरवाने का प्लान बनाया और उसने अपने मालिक के ड्राइवर की एक पुरानी कहानी निकाली। कुछ साल पहले एक भाई बहन उस एनजीओ में आए थे। दोनों के बड़े होने तक उनका ख्याल रखा गया फिर उन्हें बेचने के लिए भेज दिया गया। वह लोग उसी ड्राइवर के साथ जा रहे थे ।लेकिन ड्राइवर ने उस लड़के को बाँध दिया और उसकी बहन का रेप किया, फिर उसे मार दिया।इससे वह लड़का सदमे में चला गया और फिर उससे एनजीओ वापस ले आया गया लड़की के बारे में पूछने से ड्राइवर ने बोला के वह लड़की गाड़ी से भागने की कोशिश कर रही थी इसी में उसे पकड़ने की कोशिश में उससे गोली चल गई और वह मर गई। यह बात राकेश भी जानता था क्योंकि वह भी साथ गया था ड्राइवर के और गोली मारने को राकेश ने ही बोला था। और राकेश ने ड्राइवर को यह धमकी दी कि वह सब कुछ बोल देगा और सारे सबूत कोर्ट में दे देगा, और ड्राइवर को फाँसी हो जाएगी, लेकिन ड्राइवर ने उससे बोला कि तुम भी तो थे वहाँ  तुम भी फसोगे लेकिन राकेश ने उससे कहा सबूत कहाँ है,और वैसे भी मैं कल्पना की नज़रों में अच्छा हूँ इस केस में मैंने पूरी मदद की इसलिए तुम्हारी बात कोई नहीं मानेगा। तो फिर ड्राइवर ने पूछा कि तुम्हें क्या चाहिए तो उसने बोला कि तुम कल्पना को मार दो और कबूल कर लो तब तुम्हें सिर्फ उम्र कैद होगी और तुम्हारे परिवार को में काफी पैसे दूँगा। और अगर तुमने सही व्यवहार किया तो सज़ा कम हो जाएगी और तुम बाहर भी सकते हो।ड्राइवर मान गया। लेकिन जोकर का क्या हुआ, जोकर कौन था, वह क्या बोलना चाहता था, जोकर कोई और नहीं उस लड़की का भाई था जिसका रेप हुआ। और उसे वहाँ इसलिए रखा गया क्योंकि वह बाहर जा के कुछ परेशानी ना करे।उससे दाराया जाता था, गलत दवाई दी जाती थी। ताकि वह सब कुछ भूलता रहे, और कभी कुछ नहीं बता सके। लेकिन एक दिन जब पहली बार जोकर ने कल्पना को कुछ बताने के लिए रोका था तो उस रात कल्पना उससे मिलने गई थी। और जब वह उसके कमरे में पहुँची तो जोकर ने उसे अपने बेड के पीछे की दीवार दिखाई उसने कुछ तस्वीरे बनाई थी उस दिन से जबसे उसकी बहन के साथ सब कुछ हुआ। वह भूलता था बाते इसलिए तस्वीर बना लेता था।सारी तस्वीरें देखकर कल्पना सब कुछ समझ गई, और वह वहाँ से चली गई, लेकिन उसके जाने के बाद जोकर बाहर गया तो उसने राकेश को ड्राइवर से कल्पना को मारने की बात करते सुना। और अगले दिन अपने हाथ पे तस्वीर बनाई अपने कमरे की ओर फिर से कल्पना को रोखने गया और अपना हाथ दिखाया कल्पना ने देखा और वह समझ गई वह कुछ बताना चाहता है, और राकेश के बोलने के बाद वह कुछ आगे बढ़ी और फिर वापस गई। कमरे में गई और सब कुछ देखा फिर उसने एक  प्लान बनाया उसने अपने एक ऑफिसर से  कहा तुम गाड़ी लेके जाओ और बीच रास्ते में कहीं गाड़ी खड़ी कर के चले जाना जैसे कि लगे गाड़ी खराब है और ड्राइवर उसका एक्सिडेंट कर दे। ऐसा ही हुआ पुलिस ने किसी दूसरी लड़की की जली हुई बॉडी का पॉर्शमातम किया और उसे कल्पना करार दिया। पुलिस के पूछने से ड्राइवर राकेश का नाम ले लिया और सारी चीजे बता दी। जिससे राकेश को उमर कैद हुई। एक कहावत है, “जोकर का कोई रंग नहीं होता वह जिसमें मिल जाए  उसे बादशाह बना देता  है।दुनिया की नज़रों में कल्पना मर चुकी है। वह अभी भी एनजीओ पे नज़र रखती है।जोकर का इलाज हो रहा है और शायद उसके ठीक होने के बाद वह एनजीओ  चलाए।कल्पना अब यहाँ नहीं रहती उसने शहर बदल लिया, नाम बदल ली और नई ज़िंदगी शुरू की।यहाँ एक महिला के इंसाफ के लिए दूसरी ने आवाज़ उठाई और अपनी पहचान मिटाई। आज अमित को अपनी कल्पना पे गर्व होगा।

Written by:-

–  Animesh Mishra

–  Anushka Anand

–  Anish Shankar

Edited by :-

– Shubham Pal Chowdhury

0/5 (0 Reviews)
Show More

Leave a Reply

avatar

Check Also

Close
Back to top button

We use cookies to give you the best online experience. By agreeing you accept the use of cookies in accordance with our cookie policy.

Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker